दिवाली की शाम कब और किस मुहूर्त में करें लक्ष्मी-गणेश पूजा? जान लें सही समय और नियम!

दीपावली यानी चारों तरफ रोशनी की जगमगाहट और उत्साह का माहौल। पूरा देश आज दीपों की रोशनी में सराबोर है। आज ८ नवंबर, रविवार है। पूरे देश में बेहद उत्साह के साथ दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस खास दिन पर हर घर में माँ लक्ष्मी और विघ्नहर्ता गणेश की आराधना की जाती है। सबका उद्देश्य बस एक ही होता है, जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहे। लेकिन पूजा का सही समय वास्तव में क्या है? और मूर्तियां स्थापित करने के नियम क्या-क्या हैं? इन बातों को लेकर अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं। आइए, इन सभी बातों को बिल्कुल सरल भाषा में विस्तार से जानते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, दीपावली की शाम पूजा के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। आज के दिन लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम ५ बजकर ५४ मिनट से शुरू हो रहा है। यह शुभ समय शाम ७ बजकर ५० मिनट तक रहेगा। यानी पूजा करने के लिए कुल १ घंटा ५६ मिनट का समय मिलेगा। इसके अलावा प्रदोष काल की शुरुआत दोपहर बाद ५ बजकर ३१ मिनट से हो रही है, जो रात ८ बजकर ९ मिनट तक रहेगा। ठीक इसी समयावधि के भीतर पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कई लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि माँ लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा क्यों की जाती है? दरअसल, माँ लक्ष्मी धन और वैभव की देवी हैं। वहीं दूसरी ओर, भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के प्रतीक माने जाते हैं। यदि इंसान के पास बुद्धि न हो और सिर्फ धन हो, तो उसका गलत इस्तेमाल होने का खतरा रहता है। इसलिए धन का उपयोग हमेशा सही कार्य में हो, इसी उद्देश्य से दोनों की एक साथ पूजा की जाती है।
इसके पीछे एक बेहद सुंदर पौराणिक कथा भी प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि माँ लक्ष्मी की अपनी कोई संतान नहीं थी। इस बात को लेकर उनके मन में काफी पीड़ा रहती थी। तब माता पार्वती ने अपने पुत्र गणेश को उन्हें सौंप दिया था। गणेश जी को पाकर माँ लक्ष्मी बेहद प्रसन्न हुईं। उन्होंने आशीर्वाद दिया कि जो भी उनकी पूजा करना चाहेगा, उसे सबसे पहले गणेश जी की पूजा करनी होगी। तभी वह पूजा पूर्ण मानी जाएगी।
पूजा के दौरान सही दिशा का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। पूजा की वेदी हमेशा उत्तर या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखनी चाहिए। पूजा करने वाले व्यक्ति का मुख हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इसके अलावा मूर्ति स्थापना के समय एक खास नियम का विशेष पालन करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गणेश जी को हमेशा माँ लक्ष्मी के बाईं ओर स्थापित करना चाहिए। हिंदू परंपरा में स्त्री को पति के बाईं ओर बैठाने का विधान है। चूँकि माँ लक्ष्मी गणेश जी की पालक माता हैं, इसलिए वे हमेशा पुत्र के दाईं ओर विराजमान होती हैं। इन नियमों का पालन करके पूजा करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।







