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माँ काली की प्रतिमा पर चढ़ाया ७०० तोले से ज्यादा सोना! बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल ने खोला इतना जेवर आने का राज!

रोशनी के पावन पर्व दीपावली और काली पूजा के अवसर पर पूरा पश्चिम बंगाल जगमगा उठा है। वीरभूमि बीरभूम में प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ और नलाटेश्वरी मंदिर से लेकर गांव-गांव तक माँ काली की आराधना की धूम मची हुई है। लेकिन इन सबके बीच हर साल की तरह इस बार भी बीरभूम जिले के दिग्गज तृणमूल कांग्रेस नेता अनुब्रत मंडल के पार्टी कार्यालय में आयोजित होने वाली काली पूजा सबसे ज्यादा सुर्खियों में बनी हुई है। इस बार भी माँ काली की प्रतिमा को करीब ७०० तोले से अधिक सोने के आभूषणों से सजाया गया है। सोने से लदी माँ काली की दिव्य प्रतिमा का रूप देखते ही बन रहा है। इस भव्य पूजा के इतिहास, माता के चमत्कारों और प्रतिमा पर इतने सारे जेवर आने की पूरी कहानी खुद अनुब्रत मंडल ने साझा की है।

प्रेस के सामने पूजा की पुरानी यादें ताजा करते हुए अनुब्रत मंडल काफी भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक पूजा की शुरुआत बहुत ही छोटे पैमाने पर हुई थी। अनुब्रत मंडल ने कहा, “यह पूजा बहुत ही कड़े नियमों और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न की जाती है। सबसे पहले यह पूजा बारुईपुकुर में शुरू हुई थी। उस समय मेरी उम्र महज १६ साल के आसपास थी। मैं बारुईपुकुर के एक स्थानीय क्लब का सदस्य हुआ करता था। हमारे घर के अंदर की गली में मैंने बहुत छोटे स्तर पर माँ काली की मूर्ति स्थापित कर पूजा शुरू की थी। बाद में क्लब के बड़े भाइयों ने सलाह दी कि इस पूजा को गली से बाहर मुख्य परिसर में लाया जाना चाहिए। तब से यह पूजा मुख्य परिसर में आयोजित होने लगी। अगर आज से हिसाब लगाया जाए, तो इस पूजा का इतिहास लगभग ६० साल पुराना हो चुका है।”

माँ काली की प्रतिमा पर करोड़ों रुपये के इतने सोने के जेवर कहाँ से आए, इसका खुलासा करते हुए अनुब्रत मंडल ने बताया, “मैं जब जेल में था और वहां से वापस लौटा, तब भी मैंने देखा कि माता उसी तरह सोने के आभूषणों से सुसज्जित हैं। दरअसल यह सारा सोना हमने या हमारी पार्टी ने नहीं खरीदा है। माँ काली का यह दरबार बेहद चमत्कारी और जाग्रत है। जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, वे खुद आकर माता के चरणों में सोने के गहने दान कर जाते हैं।” हाल ही में जेल से रिहा होकर आए अनुब्रत ने यह भी माना कि इस साल पूजा के आयोजन को लेकर उनके मन में थोड़ा संदेह था। उन्होंने कहा, “मुझे लगा था कि शायद इस बार परिस्थितियों के कारण हमें किसी चीज की कमी महसूस होगी या पार्टी स्तर पर आयोजन में परेशानी आएगी। लेकिन माता की ऐसी कृपा रही कि इस बार भी हमें किसी भी चीज़ की कोई कमी महसूस नहीं हुई।”

प्रतिमा के भव्य रूप के साथ-साथ अनुब्रत मंडल के कार्यालय में बनने वाला महाभोग भी हमेशा चर्चा का केंद्र रहता है। पूजा के भोग के बारे में पूछे जाने पर अनुब्रत मंडल ने बताया कि पारंपरिक व्यंजनों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। माता के भोग में विशेष रूप से तैयार खिचड़ी, पत्तागोभी की सब्जी, ९ तरह के स्वादिष्ट पकोड़े या तले हुए व्यंजन, पायसम (खीर) और चटनी शामिल हैं। इसके अलावा धार्मिक परंपरा के अनुसार बलि के बाद मटन (बकरे का मांस) भी भोग के रूप में तैयार किया जाता है। पूरी रात चलने वाली इस पूजा के बाद हजारों श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच यह महाभोग वितरित किया जाएगा।

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